छत्तीसगढ़ी नृत्य : सुआ नाचा छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य - CGplaces.com | Chhattisgarh Tourism, Chhattisgarh Culture, News, Education, Jobs

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पारम्परिक सुआ नृत्य 
सुआ नृत्य (सुआ नाचा) एक लोक नृत्य है जिसे छत्तीसगढ़ में आदिवासियों द्वारा किया जाता है। यह एक नृत्य रूप है जिसे विशेष रूप से महिलाओं और पुरुषों के समूह द्वारा गौरा-गौरी (भगवान शिव और पार्वती) के विवाह आयोजन के अवसर पर अक्टूबर और नवंबर के महीने में किया जाता है। आमतौर पर यह नृत्य दिवाली से पहले शुरू होता है। यह नृत्य रूप भगवान की पूजा करने के लिए है।

सुआ का शाब्दिक अर्थ है तोता, इसलिए नृत्य को तोता नृत्य के रूप में भी जाना जाता है। इस नृत्य प्रदर्शन के दौरान, महिलाये अपने सिर को तोते की तरह झुकाती है और पैरो को तोते की तरह चलने की कल्पना करते हुए नाचती है। और पुरुष कुछ पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्र बजाते हैं।

सुआ नृत्य
इस नृत्य में महिलाएं लकड़ी के तोते तैयार करती हैं और इसे एक टोकरी पर रखती हैं जो कि धान से भरी होती हैं। एक लड़की अपने सिर पर टोकरी रखती है और उसे बीच में रखकर चारो तरफ घूमते हुए डांस करती है।


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